शुक्रवार, 15 मई 2009

हाइकू ...

हाइकू
सांझ सकारे
याद तुम्हारी आई
तुम्हे पुकारे
-- --
बच्चों की टोली
छू माँ का आँचल
करे ठिठोली
+ +
गरीबी रेखा
बढ़ती हुई दिखी
जिधर देखा
* *
नन्ही चिडियां
खेल रही आँगन
जैसे गुडिया
-आनंद

3 टिप्‍पणियां:

sanjaygrover ने कहा…

हुज़ूर आपका भी .......एहतिराम करता चलूं .....
इधर से गुज़रा था- सोचा- सलाम करता चलूं ऽऽऽऽऽऽऽऽ

कृपया एक अत्यंत-आवश्यक समसामयिक व्यंग्य को पूरा करने में मेरी मदद करें। मेरा पता है:-
www.samwaadghar.blogspot.com
शुभकामनाओं सहित
संजय ग्रोवर

SWAPN ने कहा…

bahut khoob haiku, main to nano kavita kahunga. bahut sunder.

सांझ सकारे
याद तुम्हारी आई
तुम्हे पुकारे

wah.

A K Kothari ने कहा…

स्थूल तन,
पत्थर के मकान,
पत्थर दिल.