सोमवार, 8 जून 2009

एक गज़ल : जब से तुम से मिली....

जब से तुम से मिली जिन्दगी
सांस लेने लगी जिन्दगी

रूह अपनी निखरने लगी
आईने-सी लगी जिन्दगी

कितने सपने लगी देखने
चार दिन की बची जिन्दगी

उनके दीदार की जुस्तजू
मेरी दीवानगी जिन्दगी

अब न जाएं यहाँ से कहीं
छोड़ तेरी गली ज़िन्दगी

यह तो है इश्क की इब्तिदा
बेखुदी हो गई ज़िन्दगी

जब न ’आनन्द’ ही हमसफ़र
बेसबब सी लगी जिन्दगी

-आनन्द

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