बुधवार, 25 नवंबर 2009

एक ग़ज़ल : हमें मालूम है संसद में कल फिर क्य हुआ होगा--

संसद में हाथापाई : एक गीतिका

रा्ज्य-सभा में लिब्राहम कमीशन मुद्दे पर जो कुछ हुआ

उसी सन्दर्भ में संसद में हाथापाई पर एक गीतिका का आनन्द उठाएं





हमें मालूम है संसद में कल फ़िर क्या हुआ होगा

कोई मुद्दा उठा होगा तो हंगामा हुआ होगा



कि जिनके थे मकां वातानुकूलित संगे मरमर के

हमारी झोपड़ी पर बहस उसने ही किया होगा



जहाँ पर धवल सुन्दर स्वच्छ संस्कॄति की अपेक्षा थी

वहीं पर पक्ष और प्रतिपक्ष कीचड़ फेंकता होगा



चले होंगे कभी रोटी पे चर्चे या बेकारी पे

मुद्दआ अन्तत: कुर्सी पर आकर ही टंगा होगा



कभी ’मण्डल’ कमण्डल पर कभी मन्दिर औ मस्जिद पर

इन्ही के नाम बरसों से तमाशा हो रहा होगा



खड़े हैं कटघरे में हम ,लगे आरोप है हम पर

कहीं पर भूल से सच बात हमने कह दिया होगा



अनास्था प्रश्न पर सरकार का गिरना जहाँ तय था

कोई क्रेता हुआ होगा ,कोई बिकता हुआ होगा



आनन्द पाठक,जयपुर

2 टिप्‍पणियां:

shama ने कहा…

Desh me itna kuchh karne ko hai,par ham gade mudde ukadne pe tule hue hain..bahut khoob likha aapne!

http://shamasansmaran.blogspot.com

http://kavitasbyshama.blogspot.com

http://aajtakyahantak-thelightbyalonelypath.blogspot.com

bebakbol ने कहा…

सच्चाई लिखी है आपने...बधाई