मंगलवार, 29 मार्च 2011

गीत : तुम ने ज्योति जलाई होगी ......

तुम ने ज्योति जलाई होगी , याद मेरी भी आई होगी

तुम ने भी तो देखा होगा, तारों को स्पन्दन करते
स्निग्ध चाँदनी की किरणों को, लहरों का आलिंगन करते

फिर तुम से रह गया न होगा ,मन ही मन शरमाई होगी
याद मेरी भी .......

प्रथम किरण के स्वागत में जब हम दोनों ने अर्ध्य चढ़ाए
ऐसा ग्रहण लगा जीवन में ,तब से अब तक उबर न पाए

मुझको सम्बल देते देते ख़ुद की पीर भुलाई होगी
याद मेरी भी.....

याद तुम्हें भी आती होगी मिट्टी को वो बने घरौंदे
निष्ठुर काल-चक्र के पाँवो तले गए थे कैसे रौंदे !

मैने तो सच मान लिया था ,तुम सच मान न पायी होगी
याद मेरी भी ....

मृत्यु मिलन है ,जन्म विरह है ,क्यों हो हर्षित ?क्यों हों दुखी ?
कभी सृजन है कभी प्रभंजन ,यह तो जीवन-क्रम , सुमुखी !

रेत पटल पर नाम मेरा लिख कितनी क़समें खाई होगी
तुम ने ज्योति जलाई होगी, याद मेरी भी आई होगी

-आनन्द

रविवार, 27 मार्च 2011

एक ग़ज़ल : मुहब्बत की जादू बयानी......

ग़ज़ल

मुहब्बत की जादू-बयानी न होती
अगर तेरी मेरी कहानी न होती

न "राधा" से पहले कोई नाम आता
अगर कोई ’मीरा" दिवानी न होती

यह राज़-ए-मुहब्बत न होता नुमायां
जो बहकी हमारी जवानी न होती

हमें दीन-ओ-ईमां से क्या लेना-देना
बलाए अगर आसमानी न होती

उमीदों से आगे उमीदें न होती
तो हर साँस में ज़िन्दगानी न होती

कोई बात तो उन के दिल पे लगी है
ख़ुदाया ! मिरी लन्तरानी न होती

रकीबों की बातों में आता न गर वो
तो ’आनन’ उसे बदगुमानी न होती

-आनन्द
नुमायां = ज़ाहिर होना
लन्तरानी = झूटी शेखी /डींग मारना