रविवार, 15 अप्रैल 2012

एक ग़ज़ल : पागलों सी बात करता है...


पागलों सी बात करता है

सत्य वो सरेआम कहता है



गालियाँ ही आज तक पाई

जब भी पर्दाफ़ाश करता है



वो अजायब घर का शै होगा

ग़ैर का जो दर्द सहता है



चाह कर भी कह नहीं पाता

जब भी अपनी बात कहता है



जब अदालत में सभी बहरे

किस से वो फ़रियाद करता है ?



अलगरज़ कुछ तो सबब होगा

कौन किस पर यूँ ही मरता है?



सूलियों पर क्यों टँगा ’आनन’?

आदमी से प्यार करता है



आनन्द.पाठक
09413395592




6 टिप्‍पणियां:

M VERMA ने कहा…

गालियाँ ही आज तक पाई
जब भी पर्दाफ़ाश करता है
यही सच है .. बहुत खूब

Arshad Ali ने कहा…

bahut khoob...
bilkul mere jaisa haal hai uska bhi..
jo mai kar guzra wo bhi wahi kamal karta hai...
shayad zindagi uljhi rahe ta umr uski bhi mere jaise ..
magar tum kab samjhoge wo bhi yahi sawal karta hai..

अरूण साथी ने कहा…

सूलियों पर क्यों टँगा ’आनन’?

आदमी से प्यार करता है

साधु-साधु

अरूण साथी ने कहा…

साधु-साधु

Sunil Kumar ने कहा…

अलगरज़ कुछ तो सबब होगा
कौन किस पर यूँ ही मरता है?
बहुत खुबसूरत ग़ज़ल दाद तो कुबूल करनी ही होगी ...

Pallavi ने कहा…

सार्थक रचना बधाई ....समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है http://mhare-anubhav.blogspot.co.uk/