शनिवार, 20 अप्रैल 2013

एक ग़ज़ल : मेरे ग़म में वो ...




मेरे ग़म में वो आँसू बहाने लगे
देख घड़ियाल भी मुस्कराने लगे

नाम उनका हवाले में क्या आ गया
’गाँधी-टोपी’ हैं फिर से लगाने लगे

रोशनी डूब कर तो तभी मर गई
जब अँधेरे गवाही में आने लगे

बोतलों में रहे बन्द ’जिन’ अब तलक
फिर चुनावों में बाहर हैं आने लगे

दल बदल आप करते रहे उम्र भर
बन्दरों को गुलाटी सिखाने लगे

उम्र भर जो कलम के सिपाही रहे
बोलियां ख़ुद वो अपनी लगाने लगे

आजकल जाने ’आनन’ को क्या हो गया
यूं ज़माने से क्यों ख़ार खाने लगे ?

आनन्द.पाठक
09413395592

1 टिप्पणी:

Kuldeep Thakur ने कहा…

मुझे आप को सुचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि
आप की ये रचना 07-06-2013 यानी आने वाले शुकरवार की नई पुरानी हलचल
पर लिंक की जा रही है। सूचनार्थ।
आप भी इस हलचल में शामिल होकर इस की शोभा बढ़ाना।

मिलते हैं फिर शुकरवार को आप की इस रचना के साथ।


जय हिंद जय भारत...

कुलदीप ठाकुर...