रविवार, 29 दिसंबर 2013

एक ग़ज़ल : नाम लेकर बुला गया कोई...

नाम लेकर बुला गया कोई 
ख़्वाब दिल में जगा गया कोई

बात मेरी तो ज़ेर-ए-लब ही थी
बात अपनी सुना गया कोई

हूर-ए-जन्नत तुम्हीं रखो, ज़ाहिद !
नूर मुझको दिखा गया कोई

रुख़ से पर्दा उठा लिया किसने
ग़ुंचा ग़ुंचा खिला गया कोई

हाय ! बिखरा के ज़ुल्फ़ को अपनी
प्यास मेरी बढ़ा गया कोई

मैं ने पूछा पता जो नासेह का
मैकदा क्यूँ बता गया कोई ?

बात ग़ैरत की आ गई ’आनन’
जान अपनी लुटा गया कोई

-आनन्द.पाठक-
09413395592

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