बुधवार, 19 मार्च 2014

एक ग़ज़ल : इक धुँआ सा उठा दिया तुम ने....


इक धुँआ सा उठा दिया तुम ने
झूट को सच बता दिया तुम ने

लकड़िय़ाँ अब भी गीली गीली हैं 
फिर भी शोला बना दिया तुम ने 

तुम तो शीशे के घर में रहते हो
कैसे पत्थर चला दिया तुम ने

आइनों से तुम्हारी यारी थी
आँख क्योंकर दिखा दिया तुम ने?

नाम लेकर शहीद-ए-आज़म का
इक तमाशा बना दिया तुम ने

खिड़कियाँ बंद अब लगी होने
जब मुखौटा हटा दिया तुम ने

रहबरी की उमीद थी तुम से
पर भरोसा मिटा दिया तुम ने

तुम पे कैसी यकीं करे ’आनन’
रंग अपना दिखा दिया तुम   ने

-आनन्द.पाठक
09413395592

शनिवार, 15 मार्च 2014

एक गीत : छेड़ गईं फागुनी हवाएँ........

आ0 मित्रो !

आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनायें........

होली गीत 

छेड़ गईं फागुनी हवाएँ
रंग चलो प्यार का लगाएँ

आई है कान्हा की टोली
राधा संग खेलन को होरी
" मोड़ ना कलाई  कन्हैया
काहे को करता बरजोरी "
ध्यान रहे होली में इतना मर्यादाएँ न टूट जाएँ
रंग चलो प्यार का लगाएँ...............

देख रही दुनिया है सारी
कुछ तो शर्म कर अरे मुरारी
लाख पड़े चाहे तू पईंयाँ
मैं न बनूँ रे कभी तुम्हारी
लोग कभी नाम मेरा लेंगे ,नाम तेरा साथ में लगाएँ
रंग चलो प्यार का लगाएँ............

मन की जो गाँठे ना खोली
काहे की, कैसी फिर होली
दिल से जो दिल ना मिल पाया
फीकी है स्वागत की बोली
रूठ गया अपना जो कोई ,आज चलो मिल के सब मनायें
रंग चलो प्यार का लगाएँ.........

आया है होली का  मौसम
तुम भी जो आ जाते,प्रियतम !
भर लेती खुशियों से आँचल
सपनों को मिल जात हमदम
रंग प्रीत का प्रिये लगा दो, उम्र भर जिसे छुड़ा न पाएँ
रंग चलो प्यार का लगाएँ.........................

-आनन्द.पाठक