बुधवार, 22 अक्तूबर 2014

मुक्तक 04

अपने सभी मित्रों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं इन पंक्तियों के साथ



आप सबको दिवाली की शुभकामना
आप जैसे सखा हों तो क्या मांगना
आप का ’स्नेह’’आशीष’मिलता रहे
रिद्धि सिद्धी करें पूर्ण  मनोकामना 


सबको दीपावली की सुखद रात हो
सुख की यश की भी सबको सौगात हो
आसमां से सितारे उतर  आयेंगे
प्यार की जो अगर दिल में बरसात हो


मौसम आया है पतंग का
बच्चे-बूढ़ों  के उमंग का
उड़ी पतंगे आसमान में
चित्र बनाती रंग-बिरंग का

बात यूँ ही  निकल गई  होगी
रुख़ की रंगत बदल गई होगी
नाम मेरा जो सुन लिया  होगा
चौंक कर वो सँभल गई होगी

:2;

कौन सा है जो ग़म दिल पे गुज़रा नहीं
बारहा टूट कर भी  हूँ   बिखरा   नहीं
अब किसे है ख़बर क्या है सूद-ओ-ज़ियाँ
इश्क़ का ये नशा है जो  उतरा नहीं

-आनन्द.पाठक-

1 टिप्पणी:

आशीष अवस्थी ने कहा…

सर आपको भी दीपावली त्यौहार की हार्दिक शुभकामनाएं , धन्यवाद !
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