सोमवार, 21 मार्च 2016

चन्द माहिया : क़िस्त.33


चन्द माहिया : होली पे.....33

:1:

भर दो इस झोली में
प्यार भरे सपने
इस बार की होली में

:2:

मारो ना पिचकारी
कोरी है अब तक
तन की मेरी सारी

:3:
रंगोली आँगन की
देख रही राहें
रह रह के साजन की

:4:
मन ऐसा रँगा ,माहिया !
जितना मैं धोऊँ
उतना ही चढ़ा ,माहिया !

:5:
इक रंग जो सच्चा है
प्रीत मिला दे तो
सब रंग से अच्छा है

-आनन्द.पाठक-
[सं 13-06-18]

कोई टिप्पणी नहीं: