शनिवार, 17 सितंबर 2016

Chand Maahiya quist : 34

चन्द माहिया : क़िस्त 34
:1:
पूछा तो कभी होता
दिल से जो मेरे
ये, किस के लिए रोता ?

:2:
सोने भी नहीं देतीं
यादें अब तेरी
रोने भी नहीं देतीं

:3:
क्यों मन से हारे हो ?
जीते जी मर कर
अब किस के सहारे हो?

:4:
ग़ैरों की सुना करते
मेरी कब सुनते
जो तुम से गिला करते

:5:
मुश्किल की पहल आए
सब्र न खो देना
इक राह निकल आए


-आनन्द पाठक


08800927181

1 टिप्पणी:

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" सोमवार 19 सितम्बर 2016 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!