शनिवार, 8 अप्रैल 2017

चन्द माहिया : क़िस्त 36

चन्द माहिया : क़िस्त 36

:1:
दुनिया को दिखाना क्या !
दिल ही नहीं मिलता
फिर हाथ मिलाना क्या !

:2:
कुछ तुम को ख़बर भी है
मेरे भी दिल में
इक ज़ौक़-ए-नज़र भी है

:3:
गुरबत में हो जब दिल
दर्द कहूँ किस से
कहना भी है मुश्किल

:4;
जितनी  भी हो अनबन
तुम पे भरोसा है
रूठो न कभी , जानम !

:5:
मेरी भी सुन लेते
मैं जो ग़लत होती
फिर कुछ भी सज़ा देते

शब्दार्थ :
ज़ौक़-ए-नज़र = रसानुभूति वाली दॄष्टि
गुरबत   में        = विदेश में/ग़रीबी में


-आनन्द.पाठक-
[ सं 15-06-18 ]

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