शनिवार, 24 जून 2017

चन्द माहिया :क़िस्त 42

चन्द माहिया  :क़िस्त 42

:1:
दो चार क़दम चल कर
छोड़ न दोगे तुम ?
सपना बन कर ,छल कर

:2:
जब तुम ही नहीं हमदम
सांसे  भी कब तक
अब देगी साथ ,सनम !

:3:
जज्बात की सच्चाई
नापोगे कैसे ?
इस दिल की गहराई   [दुहराया गया]

:4;
सबसे है रज़ामन्दी
सबसे मिलते हो
बस मुझ पर पाबन्दी  [दुहराया गया]

:5:
क्या और तवाफ़ करूँ
इतना ही जाना
मन को भी साफ़ करूँ

-आनन्द.पाठक-
[सं 15-06-18]

कोई टिप्पणी नहीं: