शनिवार, 2 जून 2018

चन्द माहिया : क़िस्त 45

चन्द माहिया : क़िस्त 45

        :1:
सब ग़म के भँवर में हैं
कौन किसे पूछे
सब अपने सफ़र में हैं

;2:
अपना ही भला देखा
देखी कब मैने
अपनी लक्षमन रेखा

:3:
माया की नगरी में
बाँधोंगे कब तक
इस धूप को गठरी में

:4:
होठों पे तराने हैं
आँखों में किसके
बोलो .अफ़साने हैं

:5:
आँखों में शरमाना
दिल  मे कुछ तो है
रह रह के घबराना



-आनन्द.पाठक-
[सं 15-06-18]

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