ग़ज़लें

ग़ज़ल 001 :चाँदी की तश्तरी में ---
ग़ज़ल 002 : रह कर भी समन्दर में
ग़ज़ल 003 : पंडित ने कहा इधर से है---
ग़ज़ल 004 : मोहन के बाँसुरी की---
ग़ज़ल 005 : तुम मिली तो मिली ज़िन्दगी---
ग़ज़ल 006 : ज़माने की अगर हम बेरुख़ी से---
ग़ज़ल 007 : हमें मालूम है संसद में फिर ---
ग़ज़ल 008 : ईमान कहाँ देखा ---
ग़ज़ल 009 : आँधियों से न कोई गिला---
ग़ज़ल 010 : रक़ीबों से क्या आप फ़रमा ----
ग़ज़ल 011 : यहाँ लोगों की आँखों में --
ग़ज़ल 012 : जुनून-ए-इश्क़ में हमने
ग़ज़ल 013 : लबों पर दुआएँ--
ग़ज़ल 014 :जहाँ पर तुम्हारे सितम --
ग़ज़ल 015: ग़म-ए-दौराँ से-- 
ग़ज़ल 016 : तुमको ख़ुदा कहा है--
ग़ज़ल 017 : चलो छोड़ देंगे --
ग़ज़ल 018 : न पर्दा उठेगा--
ग़ज़ल 019 : वह उसूलों पर चला है --
ग़ज़ल 020 : संदिग्ध आचरण है ---
ग़ज़ल 021 : लहरों के साथ वह भी--
ग़ज़ल 022 : मुहब्बत की जादू बयानी न--
ग़ज़ल 023 :आते नहीं है मुझको--
ग़ज़ल 024 : जब से उनकी आत्मा है--
ग़ज़ल 025 : चुनावों के मौसम --
ग़ज़ल 026 : आप इतना ख़ौफ़ क्यों
ग़ज़ल 027 : मैं इस शह्र-ए-उमरा में--
ग़ज़ल 028 : पागलों सी बात करता है---
ग़ज़ल 029 : सोचता हूँ इस शह्र में --
ग़ज़ल 030 : लोग अपनी ही सुनाने में ---
ग़ज़ल 031 :  ऐसी भी हो ख़बर--
ग़ज़ल 032 : ख़यालों में जब से वो आने ---
ग़ज़ल 033 : वो मुखौटे बदलता रहा --
ग़ज़ल 034 : महल की बुनियाद-- 
ग़ज़ल 035: लोग अपनी बात कह कर --  
ग़ज़ल 036 : इज़हार-ए-मुहब्बत के--
ग़ज़ल 037 : वह आम आदमी है --
ग़ज़ल 038 : बदली हुई जो आप की--
ग़ज़ल 039 : आप मुझको सामने पाते-- 
ग़ज़ल 040 : बहुत से रंज़-ओ-ग़म ऐसे --
ग़ज़ल 041 : कोई नदी जो उनके दर से--
ग़ज़ल 042 : क्या करेंगे आप से हम--
ग़ज़ल 043 : चौक पे कन्दील जब ---
ग़ज़ल 044 : आज तो तुम पल रही हो---
ग़ज़ल 045 : परदे के पीछे से ---
ग़ज़ल 046 : रोशनी से कब तलक---
ग़ज़ल 047 :वो चाहता है तीरगी--
ग़ज़ल 048 : दर्द-ए-उल्फ़त है ---
ग़ज़ल 049 : आदर्श की किताबें---
ग़ज़ल 050 : वो शहादत पे सियासत --
ग़ज़ल 051 : आप हुस्न-ओ-शबाब रखते हैं
ग़ज़ल 052 : गो धूप तो हुई है---
ग़ज़ल 053 : तुम्हारा शौक़ ये होगा--
ग़ज़ल 054 : मेरे दिल की धड़कन ने--
ग़ज़ल 055 : नाम ले कर बुला गया कोई-- 
ग़ज़ल 056 :ये बाद-ए-सबा है--
ग़ज़ल 057 :राह अपनी वो चलता--
ग़ज़ल 058 : इक धुआँ सा उठा दिया--
ग़ज़ल 059 :अब तो उठिए बहुत सो लिए-- 
ग़ज़ल 060 :वही मुद्दे वही वादे 
ग़ज़ल 061 : आज फिर से मुहब्बत
ग़ज़ल 062 : ऐसे समा गए हो 
ग़ज़ल 063 : तलाश जिसकी थी
ग़ज़ल 064 :  चेहरे पे था निक़ाब---
ग़ज़ल 065 : फिर से नये चिराग़ जलाने--
ग़ज़ल 066 : दो दिल की दूरियों से--
ग़ज़ल 067 : इधर गया या उधर गया--
ग़ज़ल 068 : रूठे हुए हैं यार--
ग़ज़ल 069 :औरों की तरह हाँ में मैने--
ग़ज़ल 070 : जादू है तो उतरेगा ही--
ग़ज़ल 071  :तेरे बग़ैर भी कोई तो --
ग़ज़ल 072 : और कुछ कर या न कर--
ग़ज़ल 073 : रास्ता इक और आएगा निकल--
ग़ज़ल 074 : अगर आप जीवन में होते न दाख़िल-- 
ग़ज़ल 075 : वो जो राह-ए-हक़ चला है उम्र भर--
ग़ज़ल 076 : उन्हे हाल अपना सुनाते भी क्या--
ग़ज़ल 077 : कहाँ तक रोकता दिल को--
ग़ज़ल 078 : इलाही ये कैसा मंज़र है--
ग़ज़ल 079 : यूँ तो तेरी गली से---
ग़ज़ल 080 : अगर सोच में तेरी पाकीजगी है--
ग़ज़ल 081 : सपनों में लोकपाल था--
ग़ज़ल 082 : निक़ाब-ए-रुख़ से--
ग़ज़ल 083 : नहीं उतरेगा अन कोई फ़रिश्ता--
ग़ज़ल 084 : जो जागे हुए हैं--
ग़ज़ल 085 : यकीं  होगा नहीं तुम को--
ग़ज़ल 086 : हौसला है दो हथेली है--
ग़ज़ल 087 : ज़रा हट के ज़रा बच के -[हास्य]
ग़ज़ल 088 : ज़िन्दगी ना हुई बेवफ़ा आजतक--
ग़ज़ल 089 : मिल जाओ अगर तुम तो--
ग़ज़ल 090 : कहने को कह रहा है--
ग़ज़ल 091 : दिल न रोशन हुआ--
ग़ज़ल 092 : वो जो चढ़ रहा था--
ग़ज़ल 093 : ये गुलशन तो सभी का है--
ग़ज़ल 094 : बहुत हो चुकी --
ग़ज़ल 095 : छुपाते ही रहे--
ग़ज़ल 096 : मिलेगा जब भी वो हम से-- 
ग़ज़ल 097 : ये कैसी रस्म-ए-उल्फ़त है--
ग़ज़ल 098 : कौन बेदाग़ है दाग़ दामन नहीं--
ग़ज़ल 099 : ये आँधी ये तूफ़ाँ--
ग़ज़ल 100 : आँख मेरी भले अश्क से नम नहीं--
ग़ज़ल 101 : झूठ का जब धुआँ---
ग़ज़ल 102 : पयाम-ए-उलफ़त मिला तो होगा--
ग़ज़ल 103 : हुस्न उनका जल्वागर था--
ग़ज़ल 104 : जड़ों तक साजिशें गहरी--
ग़ज़ल 105 : वातानुकूलित आप ने आश्रम--
ग़ज़ल 106 : तुम भीड़ ख़रीदी देखे हो--
ग़ज़ल 107 : एक समन्दर मेरे अन्दर--
ग़ज़ल 108 : वक़्त सब एक सा नहीं रहता--
ग़ज़ल 109 : आज इतनी मिली है ख़ुशी आप से--
ग़ज़ल 110 : राम की बात करते हैं--
ग़ज़ल 111 : लोग क्या क्या नहीं कहा करते-- 
ग़ज़ल 112 : इधर आना नहीं ज़ाहिद--
ग़ज़ल 113 : हाथ क्या उनसे मिलाते--
ग़ज़ल 114 : आदमी से क़ीमती हैं कुर्सियाँ
ग़ज़ल 115 : बेसबब उनको जो मेहरबाँ देखा--
ग़ज़ल 116 : रोशनी के नाम से डरता है--
ग़ज़ल 117 : कहाँ आवाज़ होती है --
ग़ज़ल 118 : रँगा चेहरा--
ग़ज़ल 119 : झूठ का है जो फ़ैला--
ग़ज़ल 120 : जब भी ये प्राण निकले--
ग़ज़ल 121 : सपनों के रखे गिरवी--
ग़ज़ल 122 : हुस्न हर उम्र में जवाँ देखा--
ग़ज़ल 123 : साज़िश थी अमीरों की--
ग़ज़ल 124 : सलामत पाँव हैं जिन के--
ग़ज़ल 125 : जान-ए-जानाँ से मैं क्या माँगू--
ग़ज़ल 126 : मैं अपना ग़म सुनाता हूँ--
ग़ज़ल 127 : सब को अपनी अपनी पड़ी है --
ग़ज़ल 128 : इश्क़ करना ख़ता क्यों है--
ग़ज़ल 129 : दुश्मनी कब तक निभाओगे कहाँ तक
ग़ज़ल 130 : क़ानून की नज़र में --
ग़ज़ल 131 : झूठ इतना इस तरह बोला गया--
ग़ज़ल 132 : भले ज़िन्दगी से हज़ारों शिकायत--
ग़ज़ल 133 : मेरे जानाँ न आज़मा मुझ को--
ग़ज़ल 134 :  नहीं जानता मैं कौन हूँ
ग़ज़ल 135 : तेरे हुस्न की सादगी --
ग़ज़ल 136 : तुम्हारे हुस्न का जल्वा--
ग़ज़ल 137 : क्या कहूँ मैने किस पे लिखी है ग़ज़ल--
ग़ज़ल 138 : दिल खुद ही तुम्हारा आदिल है--
ग़ज़ल 139 : दिल में जो अक्स--
ग़ज़ल 140 : आदमी का कोई भी भरोसा नहीं--
ग़ज़ल 141 : गर्द दिल से अगर  उतर जाए--
ग़ज़ल 142 : आप से क्या मिले--
ग़ज़ल 143 : आइने आजकल ख़ौफ़ खाने लगे--
ग़ज़ल 144 : रोशनी मद्धम नहीं करना--
ग़ज़ल 145 : लगे दाग़ दामन पे --    
ग़ज़ल 146 : क़ातिल के हक़ में लोग
ग़ज़ल 147 : बात दिल पे लगा के बैठे हैं
ग़ज़ल 148 : ज़िन्दगी ना हुई बावफ़ा आजतक--
ग़ज़ल 149 : मुहब्बत जाग उठी दिल में--
ग़ज़ल 150 : फ़ुरसत कभी मिलेगी जो कार-ए-जहान से..
ग़ज़ल 151 : आई ख़बर इधर नई कल --
ग़ज़ल 152 : रफ़्ता रफ़्ता कटी ज़िन्दगी--
ग़ज़ल 153 : दीदार-ए-हक़ में दिल को अभी--
ग़ज़ल 154 : ज़िन्दगी से हमेशा बग़ावत रही--
ग़ज़ल 155 : बेज़ार हुए क्यों तुम --
ग़ज़ल 156 : फिर वही इक नया बहाना है
ग़ज़ल 157 : सारी ख़ुशियाँ इश्क़-ए-कामिल
ग़ज़ल 158 :
ग़ज़ल 159 :
ग़ज़ल 160 :



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